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अमेरिका का Venezuela पर बड़ा हमला: राष्ट्रपति निकोलस मादुरो गिरफ्तार, तेल को लेकर छिड़ी वैश्विक जंग

Attack on Venezuela

अमेरिका का Venezuela पर बड़ा हमला: राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी से वैश्विक हलचल

अमेरिका ने  Venezuela पर एक विनाशकारी हमला किया है। इस हमले के दौरान अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर लिया। अमेरिका के इस हमले के बाद पूरी दुनिया में अफरा-तफरी और अनिश्चितता का माहौल बन गया है।

इस पूरे घटनाक्रम पर भारत के विदेश मंत्रालय ने भी प्रतिक्रिया दी है। मंत्रालय ने कहा,
“Venezuela में जो कुछ हो रहा है, वह चिंता का विषय है। हम पूरी स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं।”

अमेरिका ने यह हमला 2 और 3 जनवरी की दरम्यानी रात को किया। रात करीब 2 बजे, लगभग 150 विमानों ने Venezuela की राजधानी कराकस पर हमला कर दिया और शहर के अलग-अलग हिस्सों में बम गिराए गए। आधी रात में हुए इस हमले से लोगों में दहशत फैल गई और कई लोग अपने घर छोड़कर भागने को मजबूर हो गए।

अमेरिकी सेना ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के आवास पर धावा बोला और महज आधे घंटे के भीतर उन्हें हिरासत में ले लिया। अमेरिका ने इस मिशन को “ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिज़ॉल्व” नाम दिया था।

बताया जा रहा है कि अमेरिकी सेना पिछले करीब पांच महीनों से इस हमले की तैयारी कर रही थी, जबकि पूरा ऑपरेशन सिर्फ पांच घंटे में पूरा कर लिया गया। अमेरिकी खुफिया एजेंसियां अगस्त महीने से ही निकोलस मादुरो की हर गतिविधि पर नजर रखे हुए थीं।

मादुरो के खाने-पीने से लेकर उनकी आवाजाही तक, हर छोटी-बड़ी जानकारी पर निगरानी रखी जा रही थी। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मिशन को हमले से चार दिन पहले मंजूरी दी थी।

इस मिशन में 15,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक शामिल थे। डोनाल्ड ट्रंप के अलावा उनकी कोर टीम के सदस्य—सीनियर सलाहकार स्टीफन मिलर, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और CIA डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ—भी इस हमले की जानकारी रखते थे। अमेरिकी सेना ने निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर इस ऑपरेशन को पूरा किया।

तेल को लेकर वैश्विक जंग

दुनिया भर में तेल भंडारों को लेकर जंग छिड़ी हुई है। रूस-यूक्रेन युद्ध भी तेल संसाधनों से जुड़ा हुआ माना जाता है। अमेरिका इस कार्रवाई को ड्रग तस्करों के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन बता रहा है, लेकिन विदेश मामलों के जानकारों का कहना है कि अमेरिका का असली मकसद वेनेजुएला के तेल भंडारों पर कब्जा करना है।

विदेश मामलों के विशेषज्ञ कमर आगा ने जागरण से खुलकर बातचीत करते हुए अमेरिका के इस हमले की निंदा की। उन्होंने कहा,
“किसी देश के नागरिकों को यह हक है कि वे अपना राष्ट्रपति खुद चुनें, न कि कोई दूसरा देश तय करे। अगर मादुरो खराब राष्ट्रपति होते, तो वेनेजुएला की जनता उन्हें हटा देती। अमेरिका पहले भी ऐसा कर चुका है। यह पहली बार नहीं है जब उसने किसी देश के राष्ट्रपति को अगवा किया हो। अब अमेरिका कह रहा है कि वह वेनेजुएला पर कब्जा करेगा और वहीं शासन करेगा।”

कमर आगा ने आगे कहा,
“मध्य पूर्व में जो कुछ हो रहा है, ईरान और रूस के साथ जो टकराव है—सब कुछ तेल के लिए है। ईरान के बारे में भी कहा जा रहा है कि वहां सत्ता परिवर्तन होना चाहिए, क्योंकि वहां तेल और गैस के बड़े भंडार हैं। रूस के पास भी गैस और तेल के विशाल संसाधन हैं।”

अमेरिका लंबे समय से यह मानता आया है कि 21वीं सदी अमेरिका की है और इस सदी में अपना दबदबा बनाए रखने के लिए तेल पर नियंत्रण जरूरी है।

कमर आगा कहते हैं,
“यही वजह थी इराक युद्ध की, जिसमें सद्दाम हुसैन को हटाया गया। अमेरिका ने सऊदी अरब को भी यह कह दिया है कि वह अपनी संपत्तियां अमेरिका को सौंप दे, क्योंकि अब तेल निकाला और बेचा अमेरिका करेगा। अमेरिका का असली लक्ष्य सिर्फ तेल पर कब्जा करना है। अमेरिका सबसे ताकतवर देश है और अपनी मनमर्जी कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय कानूनों का अब कोई मतलब नहीं रह गया है।”

वहीं रोबिंद्र सचदेव ने कहा,
“अमेरिका ने यह हमला सिर्फ कोकीन और गैंग वॉर की वजह से नहीं किया, बल्कि तेल भंडारों पर कब्जा करने के लिए भी किया है। वेनेजुएला सीधे चीन को तेल सप्लाई कर रहा था, लेकिन अमेरिका नहीं चाहता कि चीन लैटिन अमेरिका में अपनी पकड़ मजबूत करे। अमेरिका साफ तौर पर चीन को वेनेजुएला से दूर रखना और खुद वहां अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहता है।”

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अमेरिका के हमले के बाद भारत पर क्या असर पड़ेगा?

2005 में भारत और वेनेजुएला के रिश्ते काफी मजबूत थे। उस समय Venezuela के राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज 4 से 7 मार्च 2005 के बीच भारत आए थे। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ द्विपक्षीय बातचीत की थी।

मार्च 2013 में जब ह्यूगो शावेज का निधन हुआ, तब यूपीए सरकार ने कॉरपोरेट मामलों के तत्कालीन राज्य मंत्री सचिन पायलट को वेनेजुएला में राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भेजा था।

इसके अलावा, निकोलस मादुरो अगस्त 2012 में Venezuela के विदेश मंत्री के तौर पर भारत आए थे। वह यहां ट्रोइका देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने पहुंचे थे।

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